शामील खाते की भूमि का विभाजन कैसे करवाया जाता है
तो देखीए इसके लिए आपको सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि शामलाती खाते की भूमि होती क्या है तो इसके लिए हम इस प्रकार समझ सकते है कि जब कोई भूमि अर्थात जमीन एक से अधिक भूमि स्वामियों के नाम पर सरकारी कागजों में लिखी रहती है तो यह माना जाता है कि वह भूमि शामलाती भूमि है।
अब हम यह समझ लेते है कि शामलाती जमीन का बटवारा कैसे करवाते है, तो देखीए इसके लिए आपको सबसे पहले वर्तमान खाते अर्थात किश्तबंदो खतोनी की नकल निकाल लेनी चाहिए उसके बाद उस खाते में से यदि किसी भी खाते धारक अर्थात सहकृषक के द्वारा पूर्व में कोई जमीन विक्रय नहीं की है तो आपको वर्तमान किश्तबंदी खतोनी के आधार पर तहसीलदार महोदय के समक्ष बटवारे के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत कर देना चाहिए जब आप आवेदन पत्र प्रस्तुत करते हो तो प्रस्तुत आवेदन पत्र में जो व्यक्ति बटवारा चाहते है उन्हे आवेदक बनाना चाहिए तथा जो लोग विभाजन नहीं चाहते है उन्हें अनावेदक बनाना चाहिए तथा आवेदन पत्र में वर्तमान खाते का वर्णन करते हुवे यह लिखना चाहिए कि वर्तमान खााते में आवेदक का कितना हिस्सा है तथा अनावेदक का कितना हिस्सा है।
उसके बाद आवेदन पत्र को तहसीलदार महोदय के समक्ष प्रस्तुत कर देना चाहिए फिर तहसीलदार महोदय अनावेदकगण को सुचना पत्र जारी करेगें तथा अनावेदकगण से जवाब प्राप्त कर उनके जवाब पर विचार करने के पश्चात मौजा पटवारी को मौके की रिपोर्ट अर्थात फर्द के लिए सुचना पत्र प्रेषित करेगें यदि पटवारी द्वारा प्रस्तुत फर्द पर आवेदक एवं अनावेदकगण सहमत हो जाते है तो तहसीलदार महोदय के द्वारा आदेश पारीत कर दिया जावेगा एवं यदि उस रिपोर्ट अर्थात फर्द से सहमत नहीं होते है तो ऐसी स्थिति में तहसीलदार महोदय के द्वारा हिस्से अनुसार रिपोर्ट बुलवाकर हिस्सा अनुसार खाते का विभाजन कर दिया जावेगा।
यदि किसी भी सहकृषक अर्थात सह स्वामी के द्वारा उस खाते की भूमि में से कोई भूमि विक्रय, दान, विनिमय, बंटवारा आदि किसी भी रूप में किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर अंतरित करवा दी जाती है जैसे कि किसी खाते में 20 बीघा जमीन है और उसमें 4 सहकृषक अ, ब, स एवं द है और यदि स के द्वारा इस खाते में से 2 बीघा जमीन किसी अन्य व्यक्ति को दान, विनिमय या विक्रय या बटवारे में माध्यम से दुसरे के नाम पर करवा दी जाती है तो ऐसी स्थिति में खाते में केवल 18 बीघा जमीन ही बचेगी।
अब बंटवारा करवाने के लिए आपको उस समय की किश्तबंदी खतोनी निकालनी पड़ेगी जब उस खाते में 20 बीघा जमीन थी अब आप उस पुरानी किश्तबंदी खतोनी को निकालेंगें फिर उस विक्रय पत्र या विनिमय या दान या उस बटवारे के आदेश की नकल को निकालेंगे जिसके माध्यम से उस खाते में से 02 बीघा भूमि सहकृषक स के द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर करवा दी है उसके बाद आप वर्तमान किश्तबंदी खतोनी को भी निकालेगें जिसमें कि 18 बीघा भूमि दर्ज है।
अब आपको क्या करना है कि आपको एक आवेदन पत्र तहसीलदार महोदय के समक्ष प्रस्तुत करने हेतु तैयार करना है जिसमें जो व्यक्ति बंटवारा करवाना चाहता है उसे आवेदक के रूप मे लेख करना है तथा जो बटवारा नहीं चाहते है उन्हे अनावेदक बनाना है तथा यह लेख करना है कि आवेदक एवं अनावेदक के नाम पर पूर्व में 20 बीघा जमीन थी जिसकी नकल संलग्न है जिसमें से अनावेदक स के द्वारा 02 बीघा भूमि दान या बिक्री या विनिमय या बंटवारे के माध्यम से अन्य व्यक्ति के नाम पर कर दी है जिसकी नकल संलग्न है इसलिए वर्तमान खाते में 18 बीघा जमीन शेष बची है इस कारण वर्तमान खाते में आवेदक ’’अ’’ को 05 बीघा कृषि भूमि प्राप्त होती है तथा अनावेदक ’’ब’’ तथा ’’द’’ को भी 05-05 बीघा जमीन प्राप्त होती है तथा अनावेदक स के द्वारा अपने हिस्से की भूमि में से उपरोक्तानुसार भूमि अंतरित कर देने से अनावेदक ’’स’’ के हिस्से की मात्र 03 बीघा भूमि ही शेष बची है। इसलिए अनावेदक स के द्वारा अंतरित की गयी भूमि को अनावेदक स के हिस्से में से कम करते हुवे हिस्सा अनुसार विभाजन किये जाने हेतु यह आवेदन पत्र श्रीमान के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
इस प्रकार से आवेदन पत्र तैयार कर आवेदन पत्र के संलग्न संपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करना है तथा फिर उस आवेदन पत्र को तहसीलदार महोदय के समक्ष प्रस्तुत करना है।
तहसीलदार महोदय के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत होने के बाद फिर तहसीलदार महोदय अनावेदकगण को सुचना पत्र जारी करेगें तथा अनावेदकगण से जवाब प्राप्त कर उनके जवाब पर विचार करने के पश्चात मौजा पटवारी को मौके की रिपोर्ट अर्थात फर्द के लिए सुचना पत्र प्रेषित करेगें यदि पटवारी द्वारा प्रस्तुत फर्द पर आवेदक एवं अनावेदकगण सहमत हो जाते है तो तहसीलदार महोदय के द्वारा आदेश पारीत कर दिया जावेगा एवं यदि उस रिपोर्ट अर्थात फर्द से सहमत नहीं होते है तो ऐसी स्थिति में तहसीलदार महोदय के द्वारा हिस्से अनुसार रिपोर्ट बुलवाकर हिस्सा अनुसार खाते का विभाजन कर दिया जावेगा।
लेकिन यदि आवेदन पत्र में लिखी गई बातें एवं प्रस्तुत दस्तावेज में भिन्नता पाई जाती है एवं यदि किसी व्यक्ति का हक प्रभावित होता है तो ऐसी स्थिति में तहसीलदार महोदय सिविल न्यायालय जाने हेतु निर्देशित कर सकते है तथा प्रस्तुत बंटवारा प्रक्ररण को आगामी 03 माह तक के लिए स्थगीत कर देगें इस 03 माह की अवधि में यदि उस व्यक्ति के द्वारा बंटवारा न किये जाने के संबंध में सिविल न्यायालय से स्थगन प्राप्त कर राजस्व न्यायालय अर्थात तहसीलदार महोदय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया जाता है तो ऐसी स्थिति में तहसीलदार सिविन न्यायालय के निर्णय तक उस बंटवारे को स्थगीत कर देगें और यदि सिविल न्यायालय से किसी प्रकार का कोई स्थगन प्राप्त नहीं होता है तो तहसीलदार अपने समक्ष प्रस्तुत प्रक्ररण एवं संलग्न दस्तावेजों के अनुसार प्रक्ररण में कार्यवाही कर सकेगें।
तो दास्तों आपको समझ आ गया होगा कि शामील खाते की भूमि का विभाजन कैसे करवाया जाता है?
तो दोस्तों कैसा लगा आज का आर्टिकल यदि आपको अच्छा लगा हो तो कमेंट कर जरूर बतायें कानून को आसान और सरल भाषा में सझने के लिए आप हमारे यूट्युब चैन ’’कानूनी ज्ञान’’ को सब्स्क्राईब करें।
आपका न्याय मित्र- भगवतीप्रसाद पुरोहित अधिवक्ता
thanks for reading my article
Kanoonigyan2022.blogspot.com

0 टिप्पणियाँ