विधवा को संपत्ति में हिस्सा कब और कैसे मिलता है
नमस्कार दर्शकों आज के आर्टिकल में हम जानेगें कि किसी भी विधवा को संपत्ति में हिस्सा कैसे मिलता है और कौन सी संपत्ति में विधवा हिस्सा प्राप्त कर सकती है और किसी भी विधवा को कब हिस्सा मिल सकता है तो आईये आज के आर्टिकल को शुरू कर लेते है।
तो देखीये सबसे पहले हम यह समझ लेते है कि किसी भी विधवा को संपत्ति कहां कहां से प्राप्त हो सकती है तो देखीये किसी भी विधवा महिला को निम्न लोगों से संपत्ति प्राप्त होती हैः-
1. पति से
2. ससुर से
तो सबसे पहले हम समझ लेते है कि किसी भी विधवा महिला को अपने पति से कब संपत्ति प्राप्त होती है तो देखीये जब किसी महिला के पति के नाम पर कोई संपत्ति है और उस महिला के पति की मृत्यु हो जाती है तो ऐसी स्थिति में उस पुरूष के अन्य कोई पुत्र पुत्री न होने की स्थिति में जो भी संपत्ति उस मृतक पति के नाम पर उसकी मृत्यु के समय रहती है उस संपत्ति को उस मृतक की विधवा अर्थात पत्नि प्राप्त करने की अधिकारीणी रहती है। अब हम यह भी समझ लेते है कि इस भूमि को कोई विधवा कैसे प्राप्त कर सकती है तो इसके लिए उस विधवा महिला को यह करना है कि सबसे पहले अपने पति का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवायें उसके बाद उसके पति के नाम से जितनी भूमि संपत्ति है उसके दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करे उसके बाद उस विधवा महिला को आवेदन पत्र तैयार करना चाहिए यदि संपत्ति कृषि भूमि है तो आवेदन पत्र तहसीलदार के यहां नामांतरण के लिए पेश होगा और यदि संपत्ति मकान या भवन प्लॉट आदि है और आबादी में स्थिति है तो नगर पालिका या ग्राम पंचायत में नामांतरण के लिए पेश होगा, उसके पश्चात संक्षिप्त प्रक्रिया के बाद अर्थात वारीसों की रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद मृतक के स्थान पर राजस्व अभिलेखों मे उस विधवा का नाम दर्ज कर दिया जावेगा।
यदि कोई महिला अपने पति के स्थान पर नामांतरण नहीं करवा पाती है और उस महिला के देवर या जेठ या देवर जेठ के पुत्रों के द्वारा उस महिला के पति का वारीस बनकर उस मृत व्यक्ति की संपत्ति को अपने नाम पर नामंतरण करवा लिया जाता है तो ऐसी स्थिति में उस महिला को उस नामांतरण आदेश की अपील उपखंड अधिकारी महोदय के समक्ष यह कहते हुवे प्रस्तुत करनी चाहिए कि मृतक की वास्तविक उत्तराधिकारी वह महिला है और उसकी बगैर जानकारी के उसके पति की संपति को उक्त लोगों ने हड़पने के उद्धेश्य से अपने नाम पर करवा ली है।
अब हम समझ लेते है कि किसी विधवा महिला को उसके ससुर से संपत्ति कब और कैसे प्राप्त होती है
तो देखीये कभी कभी क्या होता है कि किसी महिला के ससुर के नाम पर कोई संपत्ति है और पति के नाम पर कोई संपत्ति नहीं है और ऐसी स्थिति में पति की मृत्यु हो जाती है तो पति की मृत्यु हो जाने के बाद उस महिला को अपने ससुर की संपत्ति प्राप्त करने का अधिकार नहीं रहता है लेकिन उसके ससुर की मृत्यु होने के बाद उस महिला को उसके ससुर की संपत्ति में से वह हिस्सा प्राप्त होगा जो यदि उसका पति जीवित होता तो उसे प्राप्त होता अर्थात उस विधवा महिला को अपने मृत पति का संपूर्ण हिस्सा प्राप्त होगा यदि उस मृत पति के कोई पुत्र पुत्री नहीं है तो और यदि पुत्र पुत्री है तो उस मृत पति का जो हिस्सा उसके पिता अर्थात उस विधवा महिला के ससुर की संपत्ति में बनता है उस हिस्से को उस मृत पति के सभी वारीस अर्थात पुत्र पुत्रीयां और पत्नि में बराबर बराबर बांट दिया जावेगा।
अब हम यह समझ लेते है कि ससुर की संपत्ति को प्राप्त करने के लिए किस प्रकार से कार्यवाही करनी होगी। तो देखीये सबसे पहले उस विधवा महिला को क्या करना है जो कि अपने ससुर की सपंति को प्राप्त करना चाहती है उसे सबसे पहले अपने मृत पति का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना चाहिए उसके बाद अपने मृत ससुर का मृत्यु प्रमाण पत्र बनावाना चाहिए उसके बाद उस विधवा महिला को उस सभी संपत्ति के प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त करना चाहिए जो कि उस विधवा महिला के ससुर की मृत्यु के समय उसके ससुर के नाम पर दर्ज रही है अर्थात उन कृषि भूमियों तथा मकान, प्लॉट, भवन के प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त कर लेने चाहिए जो कि उस विधवा महिला के ससुर की मृत्यु के समय उसके ससुर के नाम पर दर्ज रहे है।
इसके बाद कृषि भूमियां होने की स्थिति में उस विधवा महिला को तहसीलदार या नायब तहसीलदार के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत करना चाहिए और उस आवेदन पत्र में वंश वृक्ष अर्थात वंशावली बनानी चाहिए जिसमें इस बात का उल्लेख हो कि उस विधवा महिला के ससुर के कितने पुत्र पुत्रीयां और पूर्व मृत पुत्र और पुत्रीयां और उनके वारीस है अब इस वंशावली अर्थात वंश वृक्ष में वह विधवा महिला उस मृत ससुर के पुर्व मृत पुत्र की विधवा की श्रेणी में आयेगी और उस विधवा महिला को अपने पति के हिस्से की संपत्ति प्राप्त करने का अधिकार है इस प्रकार का आवेदन पत्र प्रस्तुत कर किसी भी विधवा महिला के द्वारा अपने ससुर की संपत्ति में से हिस्सा प्राप्त किया जा सकता है।
लेकिन यदि उस ससुर के अन्य वारीसों के द्वारा उस विधवा की जानकारी के बगैर उस ससुर की संपत्ति को अन्य वारीसों ने अपने नाम पर नामांतरण करवा लिया है तो ऐसी स्थिति वह विधवा महिला उस नामांतरण को सक्षम न्यायालय में जैसे कृषि भूमि होने की स्थिति में उपखण्ड अधिकारी महोदय के समक्ष अपील प्रस्तुत कर सकती है लेकिन यदि अधिक समय हो चुका है तो ऐसी स्थिति में उस विधवा महिला को सिविल न्यायलय में स्वत्व घोषणा हेतु दावा प्रस्तुत करना चाहिए अर्थात उस विधवा महिला को उपरोक्तानुसार वंश वृक्ष अर्थात वंशावंली बनाकर दावा प्रस्तुत करना चाहिए कि वह विधवा महिला मृतक ससुर के पूर्व मृत पुत्र की विधवा है तथा उसके पति की मृत्यु उसके ससुर की मृत्यु से पूर्व हो चुकी है इसलिए उस विधवा महिला को अपने ससुर की संपत्ति में से वह हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार है जो उसके पति को प्राप्त होता यदि उसका पति आज जीवित होता लेकिन आज उसका पति जीवित नहीं है ऐसी स्थिति में उसके पति के हिस्से की भूमि की स्वामिनी उस विधवा महिला को घोषित किया जावे।
देखीये पाठकों कोई भी ससुर पैतृक संपत्ति के संपूर्ण भाग की वसीयत नहीं कर सकता है और वह ससुर उस पैतृक संपत्ति को अन्य तरीके से जैसे विक्रय पत्र, दान पत्र, विनिमय पत्र, बंटवारा आदि प्रकार से संपूर्ण संपत्ति को अंतरित भी नहीं कर सकता है यदि कोई ससुर ऐसा करता है तो सिविल न्यायालय में वाद प्रस्तुत कर इस प्रकार के अंतरण को रद्ध करवाय जा सकता है।
तो दर्शकों मैं विश्वास रखता हूं कि आपको आज का आर्टिकल अच्छा लगा होगा यदि आप कानून को सरल और आसान भाषा में समझना चाहते है तो आप इस आर्टिकल के नीचे बने कमेंट बॉक्स में जाकर एक अच्छी सी कमेंट कर दिजिए और हमारे यूट्युब चेनल ’’कानुनी ज्ञान’’ को सब्स्क्राईब कर दिजिए फिर मिलते है नई कानुनी जानकारी के साथ नये आर्टिकल के साथ तब तक के लिए ! जय हिन्द जय भारत !
आपका न्याय मित्र - भगवतीप्रसाद पुरोहित अधिवक्ता

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